10th chapter 4
कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ (SOME IMPORTANT DEFINITIONS)
1. कार्बन (Carbon)- यह एक तत्त्व है जिसका परमाणु क्रमांक 6, द्रव्यमान संख्या 12 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 24 होता है। इसे 'C प्रतीक द्वारा प्रकट किया जाता है।
2. कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds)-जिन यौगिकों में कार्बन विद्यमान होता है, उन्हें कार्बनिक यौगिक कहते हैं। ये प्रायः सहसंयोजी यौगिक होते हैं।
3. सहसंयोजी यौगिक (Covalent Compounds)- यौगिक जिनमें सहसंयोजी आबंध होते हैं. सहसंयोजी यौगिक कहलाते हैं।
4. सहसंयोजी आबंध (Covalent Bonds)-वे रासायनिक आबंध जो दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनते हैं, उन्हें सहसंयोजी आबंध कहते हैं।
5. संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons)-किसी तत्त्व के परमाणु के बाह्यतम् कक्ष में विद्यमान इलेक्ट्रॉन के रासायनिक क्रिया में भाग लेते हैं, उन्हें संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं।
6. संयोजकता (Valency)-किसी तत्त्व के परमाणु के बाहातम कक्ष में विद्यमान इलेक्ट्रॉन जो वास्तव में रासायनिक आबंध बनाने में भाग लेते हैं, उस तत्त्व की संयोजकता कहलाती है।
अथवा किसी तत्त्व की संयोजन क्षमता उसकी संयोजकता कहलाती है।
7. अपररूपता (Allotropy)-वह परिघटना जिसमें एक तत्व दो अथवा दो से अधिक रूपों में पाया जाता है जिनकं भौतिक गुण असमान तथा रासायनिक गुण समान होते हैं. अपररूपता कहलाती हैं।
8. अपररूप (Allotropes)-एक ही तत्त्व के विभिन्न रूप जिनके भौतिक गुण असमान होते हैं. परन्तु रासायनिक गुण एक समान होते हैं, अपररूप कहलाते है।
9. हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)-कार्बन तथा हाइड्रोजन से बने कार्बनिक यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।
10. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons)-वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एकत आबंध होता है, उन्हें संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं।
11. एल्केन (Alkanes)-वे संतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनका सामान्य सूत्र Cn H2n+2 ,जहाँ n = 1, 2, 3, ... होता है, एल्केन कहलाते हैं।
विज्ञान-X
12. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)- वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-अथवा त्रि-आबंध होता है, उन्हें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं।
13. समावयव (Isomers)-कार्बन के यौगिक जिनका आण्विक सूत्र समान होता है परन्तु संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न हो. समाववव कहलाते हैं।
14. समावयवता (Isomerism)-वह परिघटना जिसमें एक ही आण्विक सूत्र के यौगिक को भिन्न-भिन्न संरचनात्मक सूत्रों की सहायता से व्यक्त किया जा सकता है, समावयवता कहलाती है।
15. विषम परमाणु (Hetro Atoms) कार्बनिक यौगिकों में हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करने वाले परमाणु विषम परमाणु कहलाते हैं।
16. एल्कीन (Alkenes)-वे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनका सामान्य सूत्र Cn H₂n, जहाँ n= 2, 3, 4, होता है, एल्कीन कहलाते हैं।
17. एल्काइन (Alkynes)-ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनका सामान्य सूत्र CnH₂n-₂ एल्काइन कहलाते हैं। जहाँ n= 2, 3, 4, होता है.
18. श्रृंखलन (Catenation)-कार्बन परमाणु अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर लंबी श्रृंखला बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं जिसे शृखलन कहते हैं।
19. प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group)-परमाणु या परमाणुओं का एक समूह जो किसी कार्बनिक यौगिक के गुणों का निर्धारण करता है एवं उस यौगिक को क्रियाशील बनाता है, प्रकार्यात्मक समूह कहलाता है।
20. समजातीय श्रेणी (Homologous Series) कार्बन के यौगिको की एक श्रृंखला जिसमें दो क्रमागत सदस्यों के बीच -CH₂, ग्रुप का अन्तर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
21. ऐल्कोहॉल (Alcohols)-कार्बन के यौगिक जिनका प्रकार्यात्मक समूह -OH होता है. ऐल्कोहॉल कहलाते हैं।
22. एल्डिहाइड (Aldehydes)-कार्बन के यौगिक जिनका प्रकार्यात्मक समूह -CHO होता है, एल्डिहाइड कहलाते हैं।
23. कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acids) कार्बन के यौगिक जिनका प्रकार्यात्मक समूह -COOH होता है, कार्बोक्सिलिक अम्ल कहलाते हैं।
24. कीटोन (Ketone)-कार्बन के यौगिक जिनका प्रकार्यात्मक समूह होता है. कीटोन कहलाते हैं।
25. दहन (Combustion)-पदार्थों का ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर प्रकाश एवं ऊष्मा उत्पन्न करना, दहन कहलाता है।
26. ऑक्सीकरण (Oxidation)-किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन से संयोग या हाइड्रोजन का त्याग करना ऑक्सीकरण कहलाता है।
27. ऑक्सीकारक (Oxidising Agents)-वे पदार्थ जो ऑक्सीजन सप्लाई करके अन्य पदार्थ का ऑक्सीकरण करते हैं. ऑक्सीकारक कहलाते हैं।
28. प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (Substitutions Reactions)-वे अभिक्रियाएँ जिसमें किसी कार्बनिक यौगिक के हाइड्रोजन का प्रतिस्थापन किसी अन्य तत्व के परमाणु अथवा परमाणुओं के द्वारा होता है, प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती है।
प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ एल्कंन में होती हैं।
29. संकलन अभिक्रियाएँ (Addition Reactions)-वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें कोई असंतृप्त यौगिक उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन अथवा किसी अन्य तत्व के साथ संयोग करके संतृप्त यौगिक में बदल जाता है. संकलन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। संकलन अभिक्रियाएँ एल्कीन तथा एल्काइन में होती हैं।
30. हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation)-किसी असंतृप्त यौगिक में उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन का संकलन हाइड्रोजनीकरण कहलाता है।
31. उत्प्रेरक (Catalysts)-वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते परन्तु अभिक्रिया की दर में परिवर्तन कर देते हैं, उत्प्रेरक कहलाते हैं।
32. किण्वन (Fermentation)-कार्बन के जटिल यौगिक का एंजाइमों अथवा सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति में सरल पदार्थों में अपघटित होना, किण्वन कहलाता है।
33. एस्टरीकरण (Esterification)-जब एक कार्बक्सिलिक अम्ल साइ H,SO, की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के साथ गर्म करने पर किया करता है तो एस्टर बनता है, इस प्रक्रम को एस्टरीकरण कहते हैं।
34. साबुन (Soaps)- साबुन तंबी श्रृंखला बाले कार्बोक्सिलिक अम्लों या वसा अम्लों के सोडियम लवण होते है। पं जल में सफाई प्रक्रिया करते हैं।
35. साबुनीकरण (Saponification)-जब रस्टर सोडियम हाइड्रॉक्साइड से किया करके कार्बोक्सिलिक अम्ल का र लवग एवं ऐल्कोहॉल बनाता है तो यह साबुन बनाने का एक प्रक्रम है जिसे साबुनीकरण कहते हैं।
36. जलरागी (Hydrophilic)-किसी लंबी श्रृंखला युक्त अणु का सिरा जो पानी की ओर आर्कषित होता है, जलरागी कहलाता है। साबुन का आयनिक सिरा जलरागी होता है।
37. जलविरागी (Hydrophobic)-किसी लंबी मृखंला युक्त अणु का सिरा जो पानी से प्रतिकर्षित होता है, जलविरागी कहलाता है। साबुन के अणु का हाइड्रोकार्बन भाग जलविरागी होता है।
38. विकृत ऐल्कोहॉल (Denatured Alcohol)- एथाइल ऐल्कोहॉल जिसमें लगभग 5% मिथाइल ऐल्कोहॉल होता है और जो पीने के योग्य नहीं होता, उसे विकृत एल्कोहॉल कहते हैं।
39. सहसंयोजी आंबध (Covalent Bond)-वह आबंध जो दो परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है, सहसंयोजी आबंध कहलाता है।
40. एकल सहसंयोजी आबंध (Single Covalent Bond)- वह सहसंयोजी आबंध जो दो परमाणुओं के बीच एक युग्म इलेक्ट्रॉनों की सांझेदारी से बनता है, एकल सहसंयोजी आबंध कहलाता है। 41. द्वि-सहसंयोजी आबध (Double Covalent Bond)- वह सहसंयोजी आबंध जो दो परमाणुओं के बीच दो युग्म इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है. द्वि-सहसंयोजी आबंध कहलाता है।
42. त्रि-सहसंयोजी आंवध (Triple Covalent Bond)-वह सहसंयोजी आबंध जो दो परमाणुओं के बीच तीन युग्म इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है, त्रि-सहसंयोजी आबंध कहलाता है।
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न
(TEXTUAL QUESTIONS)
* अनुभाग 4.1 (पेज-68) के प्रश्न
प्रश्न 1. CO₂, सूत्र वाले कार्बन डाइऑक्साइड की इलेक्ट्रॉन बिंदु सरंचना क्या होगी?
उत्तर- कार्बन का परमाणु क्रमांक = 6.
कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 4.
ऑक्सीजन की परमाणु संख्या = 8.
ऑक्सीजन का इलेक्ट्रानिक विन्यास = 2, 6.
कार्बन परमाणु को अष्टक बनाने के लिए चार इलेक्ट्रॉनों तथा प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु को दो इलेक्ट्रानों की आवश्यकता है। इसलिए CO₂, अणु में कार्बन परमाणु दो युग्म इलेक्ट्रानों की सांझेदारी एक ऑक्सीजन परमाणु से तथा अन्य दो युग्म इलेक्ट्रानों की साझेदारी दूसरे ऑक्सीजन परमाणु से करता है। अतः CO₂ की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना निम्न प्रकार से होगी-
चित्र- CO₂को इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
प्रश्न 2. सल्फर के आठ परमाणुओं से बने सल्फर के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंतु सरंचना क्या होगी? (संकेतः सल्फर के आठ परमाणु एक अँगूठी के रूप में आपस में जुड़े होते हैं।)
उत्तर- सल्फर का परमाणु क्रमांक 16 सल्फर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2,8,6
सल्फर परमाणु के बाह्यतम कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। अतः इसे अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। सल्फर का आण्विक सूत्र = S8 अतः S8, अणु में दो सल्फर परमाणुओं के बीच एक युग्म इलेक्ट्रॉनों की साँझेदारी होगी। सल्फर अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना निम्न प्रकार से होती है
(a
(b)
(c)
चित्र-(a) सल्फर अणु (S) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
* अनुभाग 4.2 (पेज-76) के प्रश्न
प्रश्न 1. पेन्टेन के लिए आप कितने संरचनात्मक समावयवों का चित्रण कर सकते हैं?
उत्तर पेन्टेन का सूत्र C5H12
पेन्टेन के तीन संरचनात्मक समावयवों का चित्रण किया जा सकता है, जो निम्न हैं:-
(1) n-पेन्टेन
(ii) Iso पेन्टेन
(iii) Neo पेन्टेन
प्रश्न 2. कार्बन के दो गुणधर्म कौन से हैं जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है?
उत्तर- कार्बन के निम्नलिखित गुणों के कारण कार्बन यौगिको की विशाल संख्या दिखाई देती है-
(1) श्रृंखलन (Catenation) कार्बन में कार्बन के अन्य परमाणुओं के साथ बंध बनाने की अद्भुत क्षमता होती है। इस गुण को श्रृंखलन कहते है। इसके कारण कार्बन परमाणु सीधी श्रृंखला बाले यौगिक, शाखित यौगिक अथवा बंद वलय जैसी संरचनाओं के यौगिक बना सकते हैं।
(ii) चतुः संयोजकता (Tetravalency)-कार्बन की संयोजकता चार होती है। इसलिए इसमें कार्बन के चार अन्य परमाणुओं या कुछ अन्य संयोजक तत्त्वों के परमाणुओं के साथ बंधन बनाने की क्षमता होती है। इस गुण के कारण ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरिन तथा अन्य अनेक तत्त्वों के साथ कार्बन के यौगिक बनते है।
प्रश्न 3. साइक्लोपेन्टेन का सूत्र तथा इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होंगे?
उत्तर- साइक्लोपेन्टेन का सूत्र- C5H10
साइक्लोपेन्टेन की सरंचना और इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना इस प्रकार है-
चित्रः साइक्लोपेन्टेन की इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना
चित्रः साइक्लोपेन्टेन की संरचना
प्रश्न 4. निम्न यौगिकों की संरचनाएँ चित्रित कीजिए:
(1) एथेनॉइक अम्ल
(ii) ब्रोमोपेन्टेन
(iii) ब्यूटेनोन
(iv) हेक्सेनैल
"क्या ब्रोमोपेन्टन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं?
उत्तर- (1) एथेनॉड़क अम्ल (CH3COOH)
(2) ब्रोमोपेन्टेन (C5H11Br)
(a) 1-ब्रोमोपेन्टेन
(b 2-ब्रोमोपेन्टेन
(C) 3-ब्रोमोपेन्टेन
अतः ब्रोमोपेन्टेन के तीन समावयव संभव है।
(iii) ब्यूटेनोन
(iv) हेक्सेनैल
प्रश्न 5. निम्न यौगिकों का नामकरण कैसे करेंगे?
उत्तर-
अनुभाग 4.3 (पेज-79) के प्रश्न
(HBSE 2018)
प्रश्न 1. एथनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
उत्तर- एथनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं क्योंकि इस प्रक्रम में ऑक्सीजन एथनॉल के साथ संयोग कर लेती है।
C₂H₂OH+2[0] एथनॉल क्षारोप KMnO4+ ऊष्मा या अम्तीकृत K₂Cr2O7, ऊष्मा CH,COOH + H₂O एथेनाइक अम्त
यह क्रिया KMnO4, अथवा K₂Cr₂O7, जैसे ऑक्सीकारकों की उपस्थिति में संपन्न होती है।
प्रश्न 2. ऑक्सीजन तथा एथइन के मिश्रण का दहन बेल्डिंग के लिए किया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन तथा वायु के मिश्रण का उपयोग क्यों नहीं किया जाना?
(SAT, Dec-2016)
उत्तर- एथाइन एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है। इसमें हाइड्रोजन की प्रतिशत मात्रा कम होने के कारण वायु में अपूर्ण दहन होता है जिसके कारण वेल्डिंग के लिए आवश्यक ऊष्मा से कम ऊष्मा मिलती है। परन्तु ऑक्सीजन तथा एथाइन के मिश्रण का दहन किया जाता है तो एथाइन का पूर्ण दहन होता है तथा वेल्डिंग के लिए उपयुक्त मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित होती है।
2C₂H₂ + 502------------- 4CO₂ +2H₂O + ऊष्मा
* अनुभाग 4.4 (पेज-83) के प्रश्न
प्रश्न 1. प्रयोग द्वारा आप ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल में कैसे अंतर कर सकते हैं?
उत्तर-
ऐल्कोहॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल में अन्तर के लिए निम्न प्रयोग किए जा सकते हैं-
(HBSE 2017)
परीक्षण
ऐल्कोहॉल
(1) सोडियम कार्बोनेट परीक्षण
कोई क्रिया नहीं होती
(ii) लिटमस परीक्षण
रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता।
(iii) क्षारीय KMnO, परीक्षण
गुलाबी रंग समाप्त हो जाता है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल
(1) सोडियम कार्बोनेट परीक्षण
CO, गैस उत्सर्जित होती है।
(ii) लिटमस परीक्षण
नीला लिटमस लाल हो जाता है।
(iii) क्षारीय KMnO, परीक्षण
कोई क्रिया नहीं होती तथा क्षारीय KMnO, के गुलाबी रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता। (HBSE 2018)
प्रश्न 2. ऑक्सीकारक क्या है?
उत्तर- ऑक्सीकारक वे पदार्थ होते हैं, जो अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन प्रदान करने की क्षमता रखते हैं एवं उन्हें ऑक्सीकृत कर देते हैं। उदाहरण-क्षारीय KMnO4, (पोटैशियम परमैगनेट) तथा अम्लीकृत K₂Cr₂O7, (पोटैशियम डाइक्रोमेट)
अनुभाग 4.5 (पेज-85) के प्रश्न
प्रश्न 1. क्या आप डिटरजेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?
उत्तर- नहीं, डिटरजेंट का उपयोग करके यह नहीं बताया जा सकता है कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं क्योंकि डिटरजेंट कठोर जल में भी झाग बना सकता है। यह साबुन की तरह कठोर जल में सफेद अवक्षेप नहीं बनाता।
प्रश्न 2. लोग विभिन्न प्रकार से कपड़े धोते हैं। सामान्यतः साबुन लगाने के बाद लोग कपड़े को पत्थर पर पटकते हैं. डंडे से पीटते हैं, बुश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन में कपड़े रगड़े जाते हैं कपड़ा साफ करने के लिए उसे रगड़ने की क्यों आवश्यकता होती है?
उत्तर- जब कपड़े पर साबुन लगाया जाता है तब साबुन की हाइड्रोकार्बन पूँछ कपड़े पर लगी ग्रीज या गन्दगी में घूस जाती है तथा कपड़े की सतह तथा पानी पर आ जाती है। इसके कारण जल का सतही तनाव (Surface tension) कम हो जाता है और जल पर गंदगी की तह जम जाती है। इसे कपड़े से हटाने के लिए कपड़े को पत्थर पा पटकना तथा बुश से रगड़ना पड़ता है या वाशिंग मशीन में उसे रगड़ना पड़ता है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के प्रश्न (TEXTUAL EXERCISES)
प्रश्न 1. एथेन का आण्विक सूत्र-C₂H6 है। इसमेंः
(a) 6 सहसंयोजक आबंध हैं
(b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं।
(c) 8 सहसंयोजक आबंध हैं।
(d) 9 सहसंयोजक आबंध हैं। (HBSE 2018)
उत्तर- (b) 7 सहसंयोजक
Hint- एथेन की संरचना HH H-C-C-H HH इसमें सात सहसंयोजक आबंध हैं।
प्रश्न 2. व्यूटेनॉन वर्तु-कार्बन यौगिक है
जिसका प्रकार्यात्मक समूह : (HBSE 2018)
(a) कार्बोक्सिलिक अम्ल
(b) ऐल्डिहाइड
(c) कीटोन
(d) ऐल्कोहॉल
उत्तर- (C) कोटोन।
प्रश्न 3. खाना बनाते समय यदि वर्तन की तली बाहर से काली हो रही है तो इसका मतलब है कि-
(७) भोजन पूरी तरह नहीं पका है।
(b) ईधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है।
(c) ईधन आई है।
(d) ईंधन पूरी तरह से जल रहा है।
उत्तर- (b) ईधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है। (SAT, Nov.-2016 (HBSE 2018)
प्रश्न 4. CH,CI में आबंध निर्माण का उपयोग कर सहसंयोजक आबंध की प्रकृक्ति समझाइए।
उत्तर- कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2,4 हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1 क्लोरिन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,7 CH, CI में कार्बन के 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन, तीन हाइड्रोजन व एक क्लोरिन परमाणु के साथ एकल सहसंयोजी आबंध बनाते हैं।
चित्र-CH₂CI में आंबध निर्माण क्लोरोमिथेन (CH,CI) में सभी आबंध एकल आबंध हैं।
प्रश्न 5. इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए
(a) एथेनॉइक अम्ल
(c) प्रोपेनोन
(b) H₂S
(d) F₂
H
(HBSE 2012)
उत्तर- (a) एथेनॉइक अम्ल (CH, COOH)
HO
H-C-C-OH
H
HC
H
इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
H
CH
संरचनात्मक सूत्र
(b) H₂S
H-S-H
HS
इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
H
संरचनात्मक सूत्र
(c) प्रोपेनोन (CH, COCH₃)
HOH
HC
H
CH
H
संरचनात्मक सूत्र
H
इलेक्ट्रॉन-बिंदु संचना
H
(d) F2
FF
संरचनात्मक सूत्र
H
इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
92 STUDENT
Refresher Series
(HBSE 2011, 2012, 2015, 2019)
उत्तर- समजातीय श्रेणी-कार्बन यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह प्रतिस्थापित करता है, उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं। इसके दो क्रमागत सदस्यों में CH ग्रुप का अंतर होता है तथा सभी सदस्यों को एक साधान्य सूत्र द्वारा निरूपित किया जाता है।
प्रश्न 6. समजातीय श्रेणी क्या है? उनाहरण के साथ समझाइए-
उदाहरण-ऐल्कोहॉल की समजातीय श्रेणी
सामान्य सूत्र CHOH, 1, 2, 3,4
#का मान
आण्विक सूत्र
IUPAC नाम
CHOH
मेथनॉल
2
CHOH
एथनॉल
3
C₂H, OH
प्रोपेनॉल
4
CH, OH
ब्यूटेनॉल
CH OH
पेन्टेनॉल
6
CH, OH
हैक्सेनॉल
प्रश्न 7. भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर एथनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल में आप कैसे अंतर करेगें-
उत्तर- एथनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल में अन्तर-
क्र.सं.
एथनॉल
भौतिक गुण
1.
इसकी मधुर गंध होती है।
2
3.
4.
इसका गलनांक 156 K होता है।
इसका क्वथनांक 351 K होता है।
यह जलीय विलयन में विद्युत का चालन नहीं करता क्योंकि यह जल में आयनीकृत नहीं होता।
क्र.सं.
रासायनिक गुण
1.
2.
लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।
सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) के साथ
कोई अभिक्रिया नहीं होती ।
एथेनॉइक अम्ल
इसकी सिरके जैसी तेज दम घोटने बाली गंध होती है।
इसका गलनांक 290 K है।
इसका क्वथनांक 391 K होता है।
यह जलीय विलयन में विद्युत का चालन करता है। क्योंकि यह जल में आयनीकृत हो जाता है।
यह नीले लिटमस को लाल कर देता है। यह सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) के साथ किय करके CO, गैस उत्सर्जित करता है। यह क्षारीय KMnO, के साथ कोई क्रिया नहीं
3
यह क्षारीय KMnO, के साथ क्रिया करके उसके
गुलाबी रंग को समाप्त कर देता है।
करता। प्रश्न 8. जब साबुन को जल में डाला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है? क्या एथनॉल जैसे दूसरे विलायकों में भी मिसेल का निर्माण होगा? (HBSE 2023)
अथवा
मिसेल का निर्माण कैसे होता है? संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर-
साबुन के अणुओं के दो सिरे (भाग) होते हैं-
(1) जायनिक सिरा (जलरागी)
(ii) हाइड्रोकार्बन सिरा (जलविरागी)
(HBSE 2023)
जब साबुन को पानी में घोला जाता है तो साबुन के अणु अपने आप को एक वृत्त को त्रिन्या को तरह व्यवस्थित कर लेते है। इस प्रकार की व्यवस्था में साबुन के अणुओं का आयनिक सिरा जल के अन्दर होता है जबकि हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर होता है।
विज्ञान-X 93
Na
हाइड्रोकार्बन सिरा
Na
आपनिक सिए
Na Ow
तेल की बूंद
Na
Na
चित्र-मिसेल का निर्माण
जल में साबुन के अणुओं की इस व्यवस्था को मिसेल कहते है। साबुन एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में घुल जाता है. इसलिए मिसेल का निर्माण नहीं करता।
प्रश्न 9. कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में इंधन के रूप में क्यों किया जाता है?
(HBSE 2011, 2012, 2014, 2017, 2018)
उत्तर- कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में किया जाता है। इसके निम्न कारण हैं-
(1) ये ऑक्सीजन में जलने पर बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा, एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
(ii) इन्हें एक बार जलाने के बाद ये निरंतर जलते रहते हैं।
(iii) इनका ज्वलन ताप न तो बहुत कम होता है और न ही बहुत अधिक।
(iv) इनका पूर्ण रूप में दहन होता है तथा धुआँ एवं अवशेष नहीं छोड़ते।
(D) इनका प्रयोग करना सरल है तथा इनका कैलोरीमान उच्च होता है।
प्रश्न 10. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर झाग के निर्माण को समझाइए।
उत्तर- कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के आयन होते हैं। जब कठोर जल को साबुन से उपचारित करते हैं तो ये आयन साबुन के अणुओं के साथ जुड़कर अघुलनशील पदार्थ (स्कम) बनाते हैं। इस प्रकार क्रिया करके साबुन के अणु तलछट (अवक्षेप) के रूप में जम जाते हैं तथा झाग नहीं बनते। कपड़ा भी अच्छी प्रकार से साफ नहीं होता।
2CHCOONa +
Ca² केल्शियम आपन
→(CHCOO), Ca + कैल्शियम सटिरेट (अवक्षेप)
2Na सोडियम आयन
सोडियम सटिरेट (साबुन)
2CH3COONa + सोडियम सटिरेट (साबुन)
Mg
मैग्नीशियम आयन
→(CH3COO),Mg + मैग्नीशियम सटिरेट (अवक्षेप)
2Na सोडियम आपर
प्रश्न 11. यदि आप लिटमस पत्र (लाल एवं नीला) से साबुन की जाँच करें तो आपका प्रेक्षण क्या होगा?
उत्तर- साबुन क्षारीय प्रकृति का होता है. इसलिए यह लाल लिटमस को नीला कर देगा। नीले लिटमस पर इसका कोई
प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रश्न 12. हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है? (Pre-Board, Jan. 2016, 2018; HBSE 2017)
उत्तर- हाइड्रोजनीकरण वह अभिक्रिया जिसमें असंतृप्त यौगिक निकेल या पैलेडियम उत्प्रेरक को उपस्थिति में हाइड्रोजन से संयोग करके संतृप्त हाइड्रोकार्बन में बदल जाता है, उसे हाइड्रोजनीकरण कहते हैं।
94 STUDENT
Refresher Series
R
R
Ni-उत्प्रे
A
RR
C
H इइड्रोजन
HH
संतृप्त यौगिक
R
R
R
R
औद्योगिक असंतृप्त धौगिक अनुप्रयोग-इस प्रक्रिया का उपयोग वनस्पति तेलों को वनस्पति घी में परिवर्तित करने के लिए किया
जाता है। वनस्पति तेल + H₂ वनस्पति पी
प्रश्न 13. दिए गए हाइड्रोकार्बन CH.CH.CH.C₂H₂ एवं CH, में किसमें संकलन अभिक्रिया होती है?
(HBSE 2012, 2016, 2018)
उत्तर- संकलन अभिक्रिया केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में होती है। इसलिए C,H, तथा C₂H₂ में ही संकलन अभिक्रिय होगी।
प्रश्न 14. संतृप्त एवं असंतृप्त कार्बन यौगिकों के बीच रासायनिक अंतर समझने के लिए एक परीक्षण बताइए।
अथवा
मक्खन एवं खाना बनाने वाले तेल के बीच रासायनिक अन्तर समझने के लिए एक परीक्षण बताइए।
उत्तर- मक्खन में सतृप्त कार्बन के यौगिक होते हैं तथा इसमें क्षारकीय KMnO, (पोटैशियम परमॅगनेट) डालने पर इसकं गुलाबी रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता। खाना बनाने वाले तेल में असंतृप्त कार्बन के यौगिक होते हैं। जिसके कारण इसमें क्षारकीय KMnO, डालने पर इसका गुलाबी रंग समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 15. साबुन की सफाई प्रक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर- साबुन की सफाई प्रक्रिया-
(HBSE 2011, 2014)
00
0
00
00000000
- जलरागी सिरा जल विरागी सिरा
Na+
Na+
कपड़ा
10
Na
ca
चित्र-साबुन की सफाई प्रक्रिया
विज्ञान-X | 95
साबुन के अणुओं के दो भाग होते हैं-
(1) आयनिक भाग (सिरा)
(ii) हाइड्रोकार्बन भाग (सिरा)
आयनिक सिरा जलरागी होता है तथा हाइड्रोकार्बन सिरा जलविरागी होता है। जब साबुन को जल में घोला जाता है तो साबुन के अणु एक विशिष्ट व्यवस्था में अपने को स्थापित कर लेते हैं। इस व्यवस्था में इसका आयनिक सिरा जल के अन्दर होता है तथा हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर होता है। ऐसा अणुओं का बड़ा समूह बनने के कारण होता है। हाइड्रोकार्बन पूंछ (सिरा) कलस्टर के भीतरी हिस्से में होता है जबकि उसका आयनिक सिरा कलस्टर की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहते हैं। मिसेल के रूप में साबुन सफाई करने में सक्षम होता है। तैलीय मैल मिसेल के केन्द्र में एकत्र हो जाते हैं। मिसेल, विलयन में कोलाइड के रूप में बने रहते हैं तथा आयन आयन विकर्षण के कारण वे अवक्षेपित नहीं होते। इस प्रकार मिसेल में तैरते मैल आसानी से हटाए जा सकते हैं।

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