Best notes of study material of science in hindi and english of class 6th, 7th, 8th .

9th science chapter 2

 कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ (SOME IMPORTANT DEFINITIONS)


1. शुद्ध पदार्थ-एक ही प्रकार के कणों से बने पदार्थ को शुद्ध पदार्थ कहते हैं।


2. मिश्रण दो अथवा दो से अधिक तत्वों या यौगिकों के मिलने से बने पदार्थ को मिश्रण कहते है। 3. समांगी मिश्रण-ऐसे मिश्रण जिनका संघटन एक समान होता है, उन्हें समांगी मिश्रण कहते हैं।


4. विलयन-दो अथवा दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं।


5. विलायक-विलयन का वह घटक जिसमें विलेय को घोला जाता है विलायक कहलाता है।


6. विलेय-विलयन का वह घटक जिसे विलायक में घोला जाता है विलेय कहलाता है।


7. विषमांगी मिश्रण ऐसे मिश्रण जिनका संघटन असमान होता है, उन्हें विषमांगी मिश्रण कहते हैं।


8. कोलाइडल विलयन-यह एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें कणों का आकार 10cm से 10cm के बीच होता है। 9. निलंबन-यह एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय पदार्थ के कण घुलते नहीं है, बल्कि माध्यम से निलंबित रहते हैं।


10. मिश्र धातु-दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु एवं अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। 11. तत्व-तत्व पदार्थ का मूल रूप होता है जिसे रासायनिक क्रिया द्वारा सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।


12. यौगिक वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक तत्वों के स्थिर अनुपात में रासायनिक रूप में संयोजन से बनता है, यौगिक कहलाता है।


13. संतृप्त विलयन-दिए गए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता हो तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।


14. असंतृप्त विलयन-यदि किसी विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्तता से कम हो, उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं। अथवा


दिए गए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ घुल जाए तो उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं। 15. अति संतृप्त विलयन यदि किसी विलयन में विलेय पदार्थ की सांद्रता संतृप्त सांद्रता से अधिक हो तो उसे अति संतृप्त विलयन कहते हैं।


16. विलयन की सांद्रता-विलायक की मात्रा (आयतन) में घुले हुए विलेय पदार्थ की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं।


17. घुलनशीलता-विलेय पदार्थ की वह मात्रा जो निश्चित तापमान पर संतृप्त विलयन में उपस्थित होती है. उसकी घुलनशीलता कहलाती है।


अथवा किसी विशेष ताप एवं दाब पर विलायक की 100g मात्रा में जितना अधिकतम विलेय को घोला जा सकता है, उसे घुलनशीलता कहते हैं।


18. धातुएँ-वे तत्व जिनमें इलेक्ट्रॉन त्यागकर धन ऑयन बनाने की क्षमता होती है, धातुएँ कहलाती हैं।

26 STUDENT Refresher Series


19. अधातुएँ-वे तत्व (हाइड्रोजन एवं हीलियम को छोड़कर) जिनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋण आँयन बनाने की त होती है, अधातुएँ कहलाती हैं।


20. उपधातुएँ-धातु एवं अधातु के बीच के गुण दशर्शाने वाले तत्व उपधातुएँ कहलाते है।


21. क्रिस्टलीकरण-यह पृथक्करण की वह विधि है जिसके द्वारा क्रिस्टल के रूप में शुद्ध ठोस को विलयन में से पुर किया जाता है।


22. क्रोमैटोग्राफी-एक ही विलायक में घुलनशील विभिन्न विलेय पदार्थों को पृथक्क करने की विधि को क्रोमैटोग्राफ कहते है।


23. टिंडल प्रभाव-किसी कोलाइडल में से प्रकाश की किरणों का पर गुजरते समय बिखर जाना टिंडल प्रभाव कहलाता है 24. उर्ध्वपातन द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को उपा कहते हैं।

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (TEXTUAL QUESTIONS)

न 1. शुद्धपदार्थ से आप क्या समझते हैं ? 


- वे पदार्थ जो एक ही प्रकार के कणों से बने होते हैं. शुद्ध पदार्थ कहलाते हैं। जैसे ऑक्सीजन, जल, सोना, तांबा

आदि।


2. समांगी और विएमांगी मिश्रणों में अंतर बताएँ।


-- समांगी मिश्रण ऐसे मिश्रण जिनका संघटन एक समान होता है, उन्हें समांगी मिश्रण कहते है। जैसे- चीनी का जलीय विलयन।


विषमांगी मिश्रण-ऐसे मिश्रण जिनका संघटन असमान होता है, उन्हें विषमांगी मिश्रण कहते हैं। जैसे- जल औ तेल का मिश्रण विषमांगी मिश्रण है।


संख्या-20


1. उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों में विभेद कीजिए।


- समांगी तथा विषमांगी मिश्रण में निम्नलिखित अन्तर हैं-

समांगी मिश्रण


(1) इन मिश्रणों का संघटन एकसमान होता है।

(2)  इस मिश्रण के विभिन्न अवयवों के बीच निश्चित सीमाएँ नहीं होती।

उदाहरण - नमक एवं चीनी का मिश्रण, एथेनाल एवं जल का मिश्रण।

विषमांगी मिश्रण

1  इन मिश्रणों का संघटन असमान होता है।

2 इस मिश्रण के विभिन्न अवयवों के बीच विभिन्न सीमाएँ होती है।

उदाहरण- रेत, चीनी, चॉक एवं जल का मिश्रण।


प्रश्न 2.

विलयन, निलंबन और कोलाइड एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं? 



विलयन, निलंबन आऔर कोलाइड में अत़ंर 


विलयन

1.यह एक समांगी मिश्रण होता है।

2.विलयन पारदर्शी होता है।

3.इसके कणों का आकार 10-7cm से भी कम होता है।

4.इसके कणों को सूक्ष्मदर्शी की सहायता से भी नहीं देखा जा सकता।

5.इसके कणों को फिल्टर पेपर की सहायता से अलग नहीं किया जा सकता।

6  निलंबन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं।

निलंबन

 1  निलंबन एक विषमांगी मिश्रण होता है।

2  यह अपारदर्शी होता है।

3  इसके कणों का आकार 105cm से भी बड़ा होता है।

4  इसके कणों को नंगी आंखों से भी - देखा जा सकता है।

5  इसके कणों को फिल्टर पेपर की सहायता से अलग किया जा सकता है।

6  निलंबन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं।

कोलाइड


■ कोलाइड 

1   विषमांगी मिश्रण होता है परंतु यह समांगी दिखाई देता है।

2   यह पारभासी होता है।

3   इसके कणों का आकार 10-7cm से 105cm के बीच होता है।

4   इसके कणों को सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है।

5    इसके कणों को फिल्टर पेपर से अलग नहीं किया जा सकता परंतु अर्धपारगम्य झिल्ली से पृथक् किया जा सकता हैं।

6   कोलाइड टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं।


प्रश्न 3. एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36g सोडियम क्लोराइड को 100g जल में 293K पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सांद्रता प्राप्त करें।

उत्तर- 293 K ताप पर

सोडियम क्लोराइड (विलेय) का द्रव्यमान 36g

जल (विलायक) का द्रव्यमान = 100g 

विलयन का द्रव्यमान =विलेय का द्रव्यमान+ विलायक का द्रव्यमान

                                = 36g+100 g = 136 g

 विलयन की सांद्रता 

                     =विलेय का द्रव्यमान/ विलयन का द्रव्यमान *100

                                 =  36 / 136 x 100 

                                 =26.47%.


पृष्ठ संख्या-21

प्रश्न 1. निम्न को रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में वर्गीकृत करें:

• पेड़ों को काटना,

• मक्खन का एक बर्तन में पिघलना,(. 2024)

अलमारी में जंग लगना,

जल का उबलकर वाष्प बनना,(HBSE. 2024)

विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना,

जल में साधारण नमक का घुलना,(HBSE. 2024)

फलों से सलाद बनाना तथा

लकड़ी और कागज का जलना

उत्तर- भौतिक परिवर्तन-

पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, जल का उबलकर वाष्प बनना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना।

रासायनिक परिवर्तन

-अलमारी में जंग लगना, विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, लकड़ी और कागज का जलना।

2. अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयल करें।

 उत्तर- शुद्ध पदार्थ-लोहा, तांबा, ऐलुमिनियम, जल, सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक), सोना, चांदी आदि। 

मिश्रण-दूध, मिट्टी, वायु, पेय पदार्थ, रक्त, टूथपेस्ट आदि।


पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के प्रश्न (TEXTUAL EXERCISES)


प्रश्न 1. निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे?

(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।

(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।

(c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक् करने में।

(d) दही से मक्खन निकालने के लिए।

 (e) जल से तेल निकालने के लिए।

(f) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक् करने में।

(g) बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।

(H) भूसे से गेहूं के दानों को पृथक् करने में।

(I) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए। 

(J) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को पृथक् करने में।


उत्तर- (a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन में से पृथक् करने के लिए वाष्पीकरण विधि का प्रयोग करेंगे। 

(b) अमोनियम क्लोराइड एक ऊर्ध्वपातनशील पदार्थ है इसलिए अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने के लिए ऊर्ध्वपातन विधि का प्रयोग करेंगे।

 (c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक करने के लिए छानना विधि का प्रयोग किया जा सकता है।


(d) दही से मक्खन निकालने के लिए अपकेंद्रण विधि का प्रयोग किया जाता है। 

(e) जल तथा तेल अघुलनशील द्रव है, इसलिए जल को तेल से अलग करने के लिए पृथक्करण कीप का प्रयोग किया जाता है।

(F) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक् करने के लिए छानना विधि का प्रयोग किया जाता है। 

(8) लोहे के कण चुंबकीय पदार्थ हैं, इसलिए बालू से लोहे के कणों को चुंबकीय पृथक्करण विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

(H) भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करने के लिए फटकना विधि का प्रयोग किया जाता है क्योंकि फटकना विधि से भूसा हल्का होने के कारण वायु में उड़कर दूर चला जाता है और गेंहू के दाने भारी होने के कारण सीधे जमीन पर गिरते हैं। 

(I) 

(J) 

प्रश्न 2. चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे, विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय (फिल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।

उत्तर- उपरोक्त शब्दों का प्रयोग करके हम निम्न प्रकार से चाय

 बनाएगें-

1. विलायक 

चाय बनाने वाले बर्तन में पानी को विलायक के रूप में लीजिए एवं इसे गैस स्टोव पर उबाल लीजिए।

2. विलेय-

पानी में चीनी को विलेय के रूप में डालिए।

 3. घुलनशील-

चीनी पानी में घुलनशील है, अतः यह जल में घुल जाती है


उत्तर- भौतिक परिवर्तन-पेड़ों को काटना, मक्खन का एक बर्तन में पिघलना, जल का उबलकर वाष्प बनना, जल में साधारण नमक का घुलना, फलों से सलाद बनाना।


रासायनिक परिवर्तन-अलमारी में जंग लगना, विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना, लकड़ी और कागज का जलना।


2. अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयल करें।


प्रश्न उत्तर- शुद्ध पदार्थ-लोहा, तांबा, ऐलुमिनियम, जल, सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक), सोना, चांदी आदि। मिश्रण-दूध, मिट्टी, वायु, पेय पदार्थ, रक्त, टूथपेस्ट आदि।


पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के प्रश्न (TEXTUAL EXERCISES)


प्रश्न 1. निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे?


(a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।


(b) अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।


(c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक् करने में।


(d) दही से मक्खन निकालने के लिए। (e) जल से तेल निकालने के लिए।


(1) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक् करने में।


(g) बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।


(11) भूसे से गेहूं के दानों को पृथक् करने में।


(1) पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए। (१) पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को पृथक् करने में।


उत्तर- (a) सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन में से पृथक् करने के लिए वाष्पीकरण विधि का प्रयोग करेंगे। (b) अमोनियम क्लोराइड एक ऊर्ध्वपातनशील पदार्थ है इसलिए अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा


अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने के लिए ऊर्ध्वपातन विधि का प्रयोग करेंगे। (c) धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक करने के लिए छानना विधि का प्रयोग किया जा


सकता है।


(d) दही से मक्खन निकालने के लिए अपकेंद्रण विधि का प्रयोग किया जाता है। (e) जल तथा तेल अघुलनशील द्रव है, इसलिए जल को तेल से अलग करने के लिए पृथक्करण कीप का


प्रयोग किया जाता है।


(1) चाय से चाय की पत्तियों को पृथक् करने के लिए छानना विधि का प्रयोग किया जाता है। (8) लोहे के कण चुंबकीय पदार्थ हैं, इसलिए बालू से लोहे के कणों को चुंबकीय पृथक्करण विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।


(1) भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक् करने के लिए फटकना विधि का प्रयोग किया जाता है क्योंकि फटकना विधि से भूसा हल्का होने के कारण वायु में उड़कर दूर चला जाता है और गेंहू के दाने भारी होने के कारण


सीधे जमीन पर गिरते हैं। प्रश्न 2. चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे, विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय (फिल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।


उत्तर- उपरोक्त शब्दों का प्रयोग करके हम निम्न प्रकार से चाय बनाएगें-


1. विलायक चाय बनाने वाले बर्तन में पानी को विलायक के रूप में लीजिए एवं इसे गैस स्टोव पर उबाल लीजिए।


2. विलेय-पानी में चीनी को विलेय के रूप में डालिए।

 

3. घुलनशील-चीनी पानी में घुलनशील है, अतः यह जल में घुल जाती है

4. घुलना-चीनी गर्म पानी में अच्छी प्रकार से घुल जाती है।

5. विलयन-चीनी पानी में घुलने पर विलयन बनाती है। अब इस विलयन में चाय की पत्तियों को डालिए तथा उबलते हुए मिश्रण में दूध डालकर फिर उबालिए।

6. अघुलनशील चाय की पत्तियाँ पानी एवं चीनी के मिश्रण में अघुलनशील 7.


हैं।

 

7 घुलेय (फिल्ट्रेट) और अवशेष चाय की पत्तियों के उबलने के बाद चाय को छलनी द्वारा छान लीजिए। घुलेय (फिलट्रेट) पदार्थ चाय को पीने के लिए प्रयोग कीजिए तथा छलनी में बचे अवशेष को फैक दीजिए।


प्रश्न 3. प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को विभिन्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए गए आंकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 g जल में विलेय पदार्थ की मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु पर्याप्त है, को निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है।

(a) 50 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी?


(b) प्रज्ञा 353 K पर पोटैशियम क्लोराइड का एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठंडा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी? स्पष्ट करें।


(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा?

 

(d) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?


उत्तर-


(4) 100 g जल में 313K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन के लिए आवश्यक पोटैशियम नाइट्रेट की

मात्रा     62 g


62 1 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन के लिए आवश्यक पोटैशियम नाइट्रेट = 1008


50 g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन के लिए आवश्यक पोटैशियम नाइट्रेट -100x50)=31 g


(b) ठंडा होने पर पोटैशियम क्लोराइड की विलेयता कम हो जाएगी तथा विलयन अति संतृप्त हो जाएगा एवं पोटैशियम क्लोराइड के क्रिस्टल बन जाएगें।


(c)

अतः इस तापमान (293 K) पर अमोनियम क्लोराइड की घुलनशीलता सबसे अधिक है।


(d) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर धनात्मक प्रभाव पड़ता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है लवण की घुलनशीलता भी बढ़ती है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित की उदाहरण सहित व्याख्या करें:

(a) संतृप्त विलयन

(b) शुद्ध पदार्थ

(c) कोलाइड

(d) निलंबन

उत्तर- (a) संतृप्त विलयन

 

दिए गए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में और 

विलेय पदार्थ नहीं घुलता तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। उदाहरण-एक 100 ml के एक बीकर में 50 ml पानी लेकर उसमें चीनी घोलते रहें तो एक अवस्था ऐशी आएगी जब और अधिक मात्रा में चीनी घुलनी बंद हो जाएगी। प्रकार हमें चौनी का जो विलयन प्राप्त होगा, वह संतृप्त विलयन होगा।


(b) शुद्ध पदार्थ-एक ही प्रकार के कणों से बने पदार्थ को शुद्ध पदार्थ कहते हैं। सभी तत्व एवं यौगिक शुद्ध पदार्थ होते हैं।

उदाहरण (1) सोना, चांदी, तांबा, लोहा, ऑक्सीजन, हाईड्रोजन, सोडियम, आदि सभी तत्व शुद्ध पदार्थ है।

(ii) कार्बन डाइऑसाइड, जल, मिथेन, चीनी, ग्लुकोज आदि सभी यौगिक शुद्ध पदार्थ हैं।

 

(c) कोलाइड-कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण होता है जिसके कणों का आकार 10 से 10m (1 nm से 100 nm) के बीच होता है। कोलाइड के कणों को नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता, इन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। कोलाइड पारभासी होते हैं एंव टिनडल प्रभाव को दशांते हैं।

उदाहरण-दूध, दूथपेस्ट, रक्त, स्याही, साबुन का घोल, शेविंग क्रीम, फेस क्रीम आदि कोलाइड हैं।

 

(d) निलंबन निलंबन एक विषमांगी मिश्रण होता है जिसके कणों का आकार 100 nam (10m) से बढ़ा होता है। इसके विलेय के कण पुलते नहीं हैं, बल्कि निलंबित रहते हैं। इसके कणों को नंगी आँखों से देखा जा सकता है तथा फिल्टर पेपर की सहायता से छानकर पृथक् किया जा सकता है।

उदाहरण

(1) चॉक पाउडर एवं जल का मिश्रण,

(ii) रेत एवं जल का मिश्रण,

(iii) नदी का गंदला पानी आदि।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करेंः

सोडा जल, लकड़ी, बर्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुई चाय।

         उत्तर

समांगी मिश्रण   सोडा जल, बर्फ, वायु, सिरका, छनी हुई चाय।

         विषमांगी  -लकड़ी, मिट्टी।

प्रश्न 6. आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है?


उत्तर- हम दिए हुए रंगहीन द्रव का क्वथनांक ज्ञात करेंगे। यदि इसका क्वथनांक 373 K (या 100°C) आता है तो दिया

गया रंगहीन द्रव शुद्ध जल है, परन्तु नहीं आता तो द्रव शुद्ध जल नहीं है।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ है?

(a) बर्फ

(b) दूध

(c) लोहा

(d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

(e) कैल्सियम ऑक्साइड

(f) पारा

(g) इंट

(h) वायु

(i) लकड़ी

उत्तर- दी गई वस्तुओं में से निम्नलिखित वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ हैं- (a) लोहा (b) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (c) कैल्सियम ऑक्साइड

(d) बर्फ (e) पारा।


प्रश्न 8.  निम्नलिखित मिश्रणों में से विलयन की पहचान करें।

(a) मिट्टी

b) समुद्री जल

(c) वायु

(d) कोयला

(८) सोडा जल

(b) समुद्री जल

(e) सोडा जल।

उत्तर- (c) वायु

प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन टिंडल प्रभाव को प्रदर्शित करेगा?

(a) नमक का घोल

(b) दूध

(c) कॉपर सल्फेट का विलयन

(d) स्टार्च विलयन

उत्तर-

(b) दूध

(d) स्टार्च विलयन।


प्रश्न 10. निम्नलिखित को तत्त्व, यौगिक तथा मिश्रण में वर्गीकृत करें:

(a) सोडियम

(h) कोयला

(b) मिट्टी

(i) वायु

(c) चीनी का घोल

(j) साबुन

(d) चाँदी

(k) मीथेन

(c) कैल्शियम कार्बोनेट

()टिन

(७) सिलिकन


उत्तर- तत्व

(a) सोडियम

(d) चांदी

(g) सिलिकन

(f) टिन


यौगिक-

(e) कैल्सियम कार्बोनेट

(k) मीथेन

         (1) कार्बन-डाइऑक्साइड

          (1) साबुन

मिश्रण-

(b) मिट्टी

(1) कोयला

(m) रक्त

(c) चीनी का घोल

(i) वायु


प्रश्न 11. निम्नलिखित में से कौन-कौन-से परिवर्तन रासायनिक हैं?


(a) पौधों की वृद्धि 

(1) जल से बर्फ बनना

(c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना  

(d) खाना पकाना

(e) भोजन का पाचन

(g) मोमबत्ती का जलना

उत्तर- निम्नलिखित परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन हैं:

(a) पौधों की वृद्धि

(g) मोमबत्ती का जलना

(b) लोहे में जंग लगना

(d) खाना पकाना

(b) लोहे में जंग लगना

(e) भोजन का पाचन






 


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