9th science chapter 5
कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ
(SOME IMPORTANT DEFINITIONS)
1. कोशिका-जीवों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को कोशिका कहते हैं।
2. असीमकेंद्रक कोशिकाएँ-जिन कोशिकाओं में केन्द्रक स्पष्ट नहीं होता तथा केंद्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है, उन्हें असीमकेंद्रक कोशिकाएं कहते हैं।
3. ससीमकेंद्रक कोशिकाएं जिन कोशिकाओं में स्पष्ट रूप से केंद्रक पाया जाता है तथा वह केंद्रक झिल्ली से घिरा
होता है, उन्हें ससीमकेंद्रक कोशिकाएं कहते हैं।
4. एककोशिक जीव-जो जीव केवल एक कोशिका के बने होते हैं, उन्हें एककोशिक जीव कहते हैं। 5. बहुकोशिक जीव-जो जीव बहुत सारी कोशिकाओं के बने होते हैं, उन्हें बहुकोशिक जीव कहते हैं।
6. प्लैस्टिड-पादप कोशिका में पाए जाने वाले कोशिकांग जिनका अपना DNA एवं राइबोसोम होते हैं। 7. प्लैज्मा झिल्ली-वसा और प्रोटीन से बने कोशिका के बाहरी आवरण की प्लैज्मा झिल्ली कहते हैं।
8. परासरण-अर्धपरागम्य झिल्ली में से जल के अणुओं की गति (गमन) को परासरण कहते हैं।
9. केंद्रक-कोशिका के मध्य में गोलाकार संरचना जो कोशिका के कार्यों पर नियंत्रण रखती है, केंद्रक कहलाती है।
10. केन्द्रकाय-कोशिका में अस्पष्ट केंद्रक क्षेत्र को केंद्रकाय कहते हैं।
11. क्रोमोसोम-केंद्रक में धागे की तरह की संरचनाएं जिनके द्वारा आनुवांशिक गुणों का स्थानांतरण होता है, गुणसूत्र अथवा क्रोमोसोम कहलाते हैं।
12. जीन-DNA के क्रियात्मक खंड को जीन कहते हैं।
13. में पायी जाने वाली संरचनाओं को अंगक कहते हैं।
14. एंडोसाइटोसिस-एककोशिक जीवों जैसे अमीबा आदि में बाहरी पर्यावरण से भोजन ग्रहण करने के प्रक्रम को एंडोसाइटोसिस कहते हैं।
15. कोशिकाद्रव्य-कोशिका में कोशिका झिल्ली से घिरे पदार्थ को कोशिकाद्रव्य कहते हैं।
16. जीवद्रव्य-कोशिका द्रव्य तथा केन्द्रक दोनों को मिलाकर जीवद्रव्य कहते हैं।
17. अंतर्दव्यीजालिका-कोशिकाद्रव्य में झिल्ली युक्त नलिकाओं का एक बड़ा तंत्र अंतर्द्रव्यीजालिका कहलाता है।
18. लाइसोसोम-कोशिकाद्रव्य में थैलीनुमा संरचनाएँ जिनमें पाचक एंजाइम होते हैं, लाइसोसोम कहलाती हैं।
19. क्लोरोप्लास्ट पादपों में पायी जाने वाली हरे रंग की प्लैस्टिड जिसमें क्लोरोफिल होता है, क्लोरोप्लास्ट कहलाती है।
20.क्रोमोप्लास्ट-पादप कोशिकाओं में पायी जाने वाली रंगीन प्लैस्टिड को क्रोमोप्लास्ट कहते हैं।
21. माइटोकॉन्ड्रिया-कोशिकाद्रव्य में पाए जाने वाले अंगक जो कोशिका को ATP के रूप में ऊर्जा प्रदान करते हैं. माइटोकॉन्ड्रिया कहलाते हैं।
22. गॉल्जी उपकरण-झिल्सी युक्त पुटिका जो कोशिकाओं में बने पदार्थों संचयन, रूपांतरण तथा पैकेजिंग का कार्य करता है, गॉल्जी उपकरण कहलाता है।
23. रसधानियाँ-कोशिका में ठोस तथा तरल पदार्थों की संग्राहक धौलियों को रसधानियाँ कहते हैं।
24. ल्यूकोप्लास्ट-पादप कोशिकाओं में पायी जाने वाली रंगहीन प्लैस्टिड जिनमें प्रोटीन एवं लिपिड तथा स्टार्च का संचा होता है. ल्यूकोप्लास्ट कहलाती है।
25. कोशिक विभाजन-नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं創
26. माइटोसिस (समसूत्री विभाजन) कोशिका विभाजन की वह प्रक्रिया जिसमें मातृ कोशिका विभाजित होकर ९ समरूप संतति कोशिकाएं बनाती है तथा उनमें गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका के समान होती है, माइॉसिस कहलाती है।
27. मिऑसिस (अर्धसूत्री विभाजन) कोशिका विभाजन की वह प्रक्रिया जिसमें मातृ कोशिका दो विभाजन के पश्चात् चार संतति कोशिकाएं बनाती हे तथा उनमें गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका से आधी होती है, मिऑसिस कहलाती है।
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (TEXTUAL QUESTIONS)
पृष्ठ संख्या-56
प्रश्न 1. कोशिका की खोज किसने और कैसे की?
उत्तर- सन् 1665 में रॉबर्ट हुक ने कोशिका की खोज की।
चित्रः कॉर्क कोशिकाएँ
उसने अपने द्वारा बनाए गए सूक्ष्मदर्शी की सहायता से कॉर्क (छाल) के एक पतले एवं छोटे टुकड़े का अध्ययन किया। उसे मधुमक्खी के छत्ते को आकृति की संरचनाएँ दिखाई दी। इन्हीं संरचनाओं को उसने कोशिका का नाम दिया।
प्रश्न 2. कोशिका को जीवन की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई क्यों कहते हैं?
उत्तर
सभी जीव एककोशिक अथवा बहुकोशिक, कोशिकाओं के द्वारा बने होते हैं। अतः कोशिका को जीवन को संरचनात्मक इकाई कहते हैं।
एक कोशिक जीवों जैसे अमीचा, पैरामीशियम आदि में जीव को सभी क्रियाएँ जैसे पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, स्थानांतरण आदि एक कोशिका ही करती है। बहुकोशिक जीवों जैसे मनुष्य में ये क्रियाएं अंगतंत्रों द्वारा को जाते है जो कोशिकाओं के ही बने होते हैं। इसलिए कोशिका को जीवन की क्रियात्मक इकाई भी कहते हैं।
पृष्ठ संख्या-58
प्रश्न 1. CO₂ तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका से कैसे अंदर तथा बाहर जाते हैं? इस पर चर्चा करें।
उत्तर- CO, का गमन कोशिका के अंदर तथा बाहर CO, का गमन विसरण विधि द्वारा होता है। जब कोशिका में CO, की सांद्रता बाहरी वातावरण की अपेक्षा अधिक होती है तो CO, कोशिका से बाहर निकल जाती है उथ जब इसकी सांद्रता कम होती है तो यह बाहरी वातावरण में से अंदर आ जाती है। पानी का गमन- कोशिका के अंदर तथा बाहर पानी का गमन तसरण विधि द्वारा होता है। जब पानी की सांदर्ता कोशिका में अधिक होती है तो यह अर्धपारगम्य झिल्ली में से बाहर निकल जाता है तथा जब पानी की सांद्रता कम होती है तो यह झिल्ली में से अन्दर आ जाता है।
प्रश्न 2. प्लैग्या झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं?
उत्तर- प्लैज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह केवल उन पदार्थों की कोशिका के अन्दर जाने देती है जो कोशिका के लिए आवश्यक होते हैं जबकि अन्य पदायों को रोक लेती है। इसी प्रकार. कोशिका से बाहर केवल उन्हीं पदार्थों को जाने देती है जो कोशिका के लिए आवश्यक नहीं है तथा आवश्यक पदार्थों को कोशिका के बाहर जाने से रोक लेती है।
प्रश्न 1. क्या अब आप निम्नलिखित तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों को भर सकते हैं, जिससे कि प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी कोशिकाओं में अंतर स्पष्ट हो सकेः
प्रोकैरियोटी कोशिका
1. आकार प्रायः छोटा (1-10 µm) 1µm = 10m
2. केंद्रकीय क्षेत्रः
.................
..............
और उसे ............कहते हैं।
3. क्रोमोसोमः एक
4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक अनुपस्थित
Answer
प्रोकैरियोटी कोशिका
1. आकार प्रायः छोटा होता है। (5-10µm) 1µm = 10m
2. केंद्रकीय क्षेत्रः अस्पष्ट होता है जो चारों ओर से केंद्रीय झिल्ली से नहीं घिरा होता और उसे केंद्रकाय कहते हैं।
3. क्रोमोसोमः एक
4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक अनुपस्थित होते हैं।
यूकैरियोटी कोशिका
1. आकार प्रायः बड़ा (5-100µm)
2. केंद्रकीय क्षेत्रः सुस्पष्ट जो चारों ओर से केंद्रकीय झिल्ली से घिरा रहता है।
3. क्रोमोसोमः एक से अधिक.
4................
..............................
Answer
यूकैरियोटी कोशिका
1. आकार प्रायः बड़ा होता है। (5 – 100μm) 1µm = 10m
2. केंद्रकीय क्षेत्रः सुस्पष्ट होता है जो चारों ओर से केंद्रकीय झिल्ली से घिरा रहता है।
3. क्रोमोसोमः एक से अधिक
4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक उपस्थित होते हैं।
संख्या-63
1. क्या आप दो ऐसे अंगकों का नाम बता सकते हैं जिन
में अपना आनुवंशिक पदार्थ
- माइटोक्रॉन्ड्रिया तथा प्लैस्टिड में अपना आनुवंशिक पदार्थ
2. यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथक क्या होगा?
- यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा राख
में विद्यमान कोशिकांग ठीक प्रकार से क्रियाएं नहीं कर स 3. लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं?
पृष्ठ संख्या-63
प्रश्न 1. क्या आप दो ऐसे अंगकों का नाम बता सकते हैं जिनमें अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है?
उत्तर- माइटोकॉन्ड्रिया तथा प्लैस्टिड में अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है।
प्रश्न 2. यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा रसायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है. तो क्या होगा?
उत्तर- यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है तो कोशिका में विद्यमान कोशिकांग ठीक प्रकार से क्रियाएं नहीं कर सकेंगे तथा कोशिका भी मृत हो जाएगी।
3. लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं? प्रश्न (HBSE. 2024)
उत्तर- लाइसोसोम थैलीनुमा कोशिकांग हैं जिनमें पाचक एंजाइम होते हैं। जब किसों व्याधान के कारण कोशिका नष्ट होती है तो लाइसोसोम फट जाते हैं तथा एंजाइम अपनी ही कोशिका को पचा (खा) लेते हैं। अतः लाइसोसोम को आत्मघाती थैली कहते हैं।
प्रश्न 4. कोशिका के अंदर प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर- राइबोसोम में।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के प्रश्न (TEXTUAL EXERCISES)
प्रश्न1. पादप कोशिकाओं तथा जंतु कोशिकाओं में तुलना करो।
उत्तर-पादप कोशिकाओं तथा जंतु कोशिकाओं की तुलना निम्नलिखित है
पादप कोशिका
1. ये प्रायः बड़े आकार की होती हैं।
2. इसमें सेल्यूलोज की बनी कोशिका भित्ति होती है।
3. इसमें प्लैस्टिड उपस्थित होते हैं।
4. रिक्तिकाएँ बड़ी होती हैं।
5. इसमें सेंट्रोसोम नहीं होता है।
6. इसमें गॉल्जीकाय पूर्ण विकसित नहीं होता।
7. इसमें भोजन स्टार्च के रूप में संग्रहित होता है।
8. इनकी एक निश्चित आकृति होती है।
जंतु कोशिका
1. ये प्रायः छोटे आकार की होती हैं।
2. जंतु कोशिका, में कोशिका भित्ति नहीं होती।
3. इसमें प्लैस्टिड अनुपस्थित होते हैं।
4. रिक्तिकाए या तो अनुपस्थित होती हैं या बहुत छोटे माप की होती हैं।
5. इसमें सेंट्रोसोम उपस्थित होता है।
6. इसमें गॉल्जीकाय पूर्ण विकसित होता है।
7. इसमें भोजन ग्लाइकॉजन के रूप में संग्रहित होता है।
8. इनकी एक निश्चित आकृति नहीं होती।
प्रश्न 2. प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ यूकैरियोटी कोशिकाओं से
उत्तर- प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ तथा पूकैरियोटी कोशिकाओं में निम्नलिखित अंतर हैं-
प्रोकैरियोटी (असीमकेन्द्रक) कोशिका
1. प्रोकैरियोटी कोशिका का आकार 1 से 10 µm के बीच होता है।
2. कोशिका में केन्द्रक स्पष्ट नहीं होता।
3. केन्द्रक क्षेत्र झिल्ली द्वारा नहीं घिरा होता है।
4. कोशिका में केवल एक गुणसूत्र पाया जाता है।
5. कोशिका में केन्द्रिका नहीं होती।
6. झिल्ली से ढके हुए कोशिकाँग नहीं होते।
7. कोशिका विभाजन मुकुलन द्वारा होता है। उदाहरण के लिए,
बैक्टीरिया, साईनोबैक्टीरिया में ये कोशिकाएँ होती हैं।
यूकैरियोटी (ससीमकेन्द्रक) कोशिका
1. यूकैरियोटी कोशिका का आकार 5 से 100 μm के बीच होता है।
2. कोशिका में केन्द्रक स्पष्ट होता है।
3. केन्द्रक क्षेत्र झिल्ली द्वारा घिरा होता है।
4. कोशिका में एक से अधिक गुणसूत्र पाए जाते हैं।
5. कोशिका में केन्द्रिका होती है।
6. झिल्ली से ढके हुए कोशिकाँग होते हैं।
7. कोशिका विभाजन समसूत्रण या अर्धसूत्रण विधि से होता है। उदाहरण के लिए,प्राणी व पौधों में ये कोशिकाएँ पाई जाती हैं।
प्रश्न 3. यवि प्लैग्या झिल्ली फट जाए अथवा टूट जाए तो क्या होगा?
उत्तर- कोशिका में प्लैज्मा झिल्ली अर्धपारगम्य होती है। यदि यह झिल्ली फट जाए अथवा टूट जाए जो कोशिका के अन्दर से आवश्यक पदार्थ बाहर आ सकते हैं तथा वे पदार्थ जो कोशिका के लिए जरूरी नहीं हैं, कोशिका के अन्दर जा सकते हैं। इस प्रकार कोशिका के कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा जिसके कारण कोशिका मृत हो जाएगी।
प्रश्न 4. यदि गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका के जीवन में क्या होगा?
उत्तर- यदि कोशिका में गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका में निम्नलिखित कार्य नहीं होंगे-
(1) अंतर्द्रव्यीजालिका द्वारा संश्लेषित पदार्थ संग्रहित नहीं होंगे।
(2) पदार्थों का संचयन, रूपांतरण तथा अंतः ग्रहण नहीं होगा।
(3) कई सामान्य शर्करा जटिल शर्करा में परिवर्तित नहीं होगी।
(4) लाइसोसोम का निर्माण नहीं होगा।
उपरोक्त कार्यों के संपन्न न होने से कोशिका मृत हो जाएगी।
प्रश्न 5. कोशिका का कौन-सा अंगक बिजलीघर है? और क्यों? उत्तर- कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया बिजलीघर का कार्य करता है क्योंकि जब भी कोशिका को ऊर्जा की आवश्यकता होती है तो माइटोकॉन्ड्रिया ही ATP के रूप में ऊर्जा की सप्लाई करते हैं। जब माइटोकॉन्ड्रिया में श्वसन क्रिया होती है तो इस क्रिया में जो ऊर्जा निकलती है, वह ATP के रूप में माइटोकॉन्ड्रिया में संचयित हो जाती है। प्रश्न 6. कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
(HBSE 2019, 2024)
उत्तर- (1) लिपिड का संश्लेषण चिकनी अंतर्द्रव्यीजालिका में होता है, तथा (HBSE 2023)
(2) प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम द्वारा कोशिकाद्रव्य तथा खुरदरी अंतर्द्रव्यीजालिक के तल पर होता है।
प्रश्न 7.अमीवा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर- अमीबा अपना भोजन एंडोसाटोसिस विधि द्वारा ग्रहण करता है।
चित्रः अमीबा में भोजन ग्रहण करने की विधि
इस प्रक्रम में अमीबा पादाभ द्वारा कपनुमा संरचना बनाता है। भोजन कण इस संरचना में प्रवेश कर जाता है। दोनों पादाभ परस्पर मिलकर भोजन कण के चारों ओर एक झिल्ली बना लेते हैं जिसे खाद्यधानी कहते हैं। इस प्रकार खाद्यधानी कोशिका द्रव्य में आ जाती है जहाँ पर भोजन का पाचन हो जाता है।
प्रश्न 8 परासरण कहते हैं।
उत्तर जल को अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा जल के अणुओं के गमन की प्रक्रिय को परासरण कहते हैं।
प्रश्न 9. निम्नलिखित परासरण प्रयोग करें- छिले हुए आधे-आधे आलू के चार टुकड़े लो, इन चारों को खोखला करो जिससे कि आलू के कप वर जाए। इनमें से एक कप को उबले आलू में बनाना है। आलू के प्रत्येक कप को जल वाले बर्तन में रखो। अब
(a) कप 'A' को खाली रखो,
(b) कप 'B' में एक चम्मच चीनी डालो,
(c) कप 'C' में एक चम्मच नमक डालो तथा
(d) उबले आलू से बनाए गए कप 'D' में एक चम्मच चीनी डालो।
आलू के इन चारों कपों को दो घंटे तक रखने के पश्चात् उनका अवलोकन करो तथा निम्न प्रश्नों का उत्तर दो-
(i) 'B' तथा 'C' के खाली भाग में जल क्यों एकत्र हो गया? इसका वर्णन करो।
(ii) 'A' आलू इस प्रयोग के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
(iii) 'A' तथा 'D' आलू के खाली भाग में जल एकत्र क्यों नहीं हुआ? इसका वर्णन करो।
उत्तर- छिले हुए कच्चे आलू से बने तीन कपों तथा उबले हुए आलू से बने एक कप को चित्रानुसार जल से भरे बर्तन में रखें
(1) B और C कप में जल एकत्रित हो गया। कच्चे आलू से बने दोनों कप वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली का कार्य करते हैं। कप-B और कप-C में क्रमशः चीनी तथा नमक हैं, परन्तु पानी नहीं है। अतः परासरण विधि द्वारा पानी कप-B तथा कप-C में प्रवेश करता है।
(2) 'A' आलू का कप कच्चे आलू से बना है जो वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली का कार्य करता है। भीतर से खालों होने के कारण जल में कोई शुद्ध गति नहीं होती। परासरण विधि के प्रेक्षण के लिए आलू 'A' इस प्रयोग में महत्त्वपूर्ण है।
(3) A और D कपों में जल एकत्रित नहीं हुआ। कप A कच्चे आलू का बना था और भीतर से खाली था पा कप D उबले आलू का था जिसमें एक चम्मच चीनी थी। उबला होने के कारण कोशिकाएँ मृत हो जाती हैं तथा मृत कोशिकाओं में परासरण क्रिया नहीं होती।
प्रश्न 10. कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु किस प्रकार के कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है तथा इसका औचित्य बताएं?
उत्तर- कापिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु समसूत्री कोशिका विभाजन (माइटोसिस) की आवश्यकता होती है। इस विभावन में एक मातृकोशिका दो समरूप कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका के समान होती है। जो जीवों की वृद्धि तथा कोशिकाओं की मरम्मत में सहायता करती है।
प्रश्न 11. युग्मकों के बनने के लिए किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है? इस विभाजन का महत्व बताएं।
उत्तर- युग्मकों (शुक्राणु एवं अडाणु) के बनने के लिए अर्थसूत्री कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है। इस कोशिका विभाजन में संतति कोशिकाओं (युग्मकों) में गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका में गुणसूत्रों को सख्या में आधी जो जाती है।
यह कोशिका विभाजन निषेचन के पश्चात् बने युग्मनज से उत्पन्न संतान में गुणसूत्रों की निश्चित संख्या को बनार उखने में सहायक होती है।







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