10th chapter 6
कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ (SOME IMPORTANT DEFINITIONS)
1. तंत्रिका कोशिका (Nerve cell/Neuron)-तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई को तंत्रिका कोशिका कहते हैं।
2. समन्वय (Coordination)-शरीर के सभी अंगों का एक साथ एक तंत्र के रूप में कार्य करके उद्दीपन के प्रति उचित क्रिया करना समन्वय कहलाता है।
3. उद्दीपन (Stimulus)-सजीवों को प्रभावित करने वाला कोई भी पर्यावरणीय परिवर्तन उद्दीपन कहलाता है।
4. अनुक्रिया (Response)-उद्दीपन से प्रभावित होकर जीव द्वारा की गई प्रतिक्रिया अनुक्रिया कहलाती है।
5. नियंत्रण (Control)-शरीर के विभिन्न कार्यों को नियमित करने की क्षमता को नियंत्रण कहते हैं। System)-तंत्रिका कोशिकाओं से बने तंत्र को तंत्रिका तंत्र कहते हैं।
6. तंत्रिका तंत्र (Nervous 7. संवेदी अंग (Sense Organs)-वे अंग जो किसी विशेष प्रकार का उद्दीपन ग्रहण करने के लिए होते हैं. सबंदी
अंग कहलाते हैं।
8. ग्राही (Receptors)-वे कोशिकाएँ या तंत्रिकाएँ जो उद्दीपन की संवेदना ग्रहण करने में सक्षम हैं, ग्राही कहलाते हैं।
9. तंत्रिका आवेग (Nerve impulse)-तंत्रिका कोशिकाओं का रासायनिक या विद्युत संकेत भेजना तत्रिका आवेग कहलाता है।
10. रासायनिक आवेग (Chemical Impulse)-जब शरीर में सूचना रासायनिक संकेत के रूप में गति करता है तो उसे रासायनिक आवेग कहते हैं।
11. विद्युत आवेग (Electrical Impulse)-जब शरीर में सूचना का स्थानांतरण विद्युत संकेत के रूप में होता है तो उसे विद्युत आवेग कहते हैं।
12. ऐच्छिक क्रियाएँ (Voluntary Actions)-वे क्रियाएँ जो हमारी इच्छानुसार होती हैं, ऐच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं।
13. अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions)-वे क्रियाएँ जो हमारी इच्छानुसार नहीं होती, अनैच्छिक क्रियाएँ कहलाती है।
14. ऐच्छिक पेशियाँ (Voluntary Muscles)-पेशियाँ जो प्रत्यक्ष रूप से हमारे मस्तिष्क के नियंत्रण में होती हैं. ऐच्छिक पेशियाँ कहलाती हैं।
15. अनैच्छिक पेशियाँ (Involuntary Muscles)-पेशियाँ जो प्रत्येक रूप से हमारे मस्तिष्क के नियंत्रण में नहीं होती हैं, अनैच्छिक पेशियाँ कहलाती हैं।
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Refresher Series
16. अंतर्ग्रथन (Synapse)-दो न्यूरॉन के बीच रिक्त स्थान जिसमें से तंत्रिका आवेग गुजर सकता है, अंतर्दधन कहलाता है।
17. न्यूरोट्रांसमीटर (Neuro-transmitters)-वे रसायन जो दो न्यूरॉन के बीच रिक्त स्थान में भरे होते हैं तथा आवेग को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक स्थानांतरित करते हैं, न्यूरोट्रांसमीटर कहलाते हैं।
18. अनुवर्तन गतियाँ (Tropic Movements)-पौधों की गलियाँ जो उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया के कारण होती हैं, अनुवर्तन गतियाँ कहलाती हैं। ये दिशा विशेष में होती हैं।
19. अनुवर्तन (Tropism)-वह परिघटना जिसमें पौधे का कोई भाग उद्दीपन की दिशा में गति करता है, अनुवर्तन कहलाता है।
20. प्रकुंचन गति (Nastic Movement)-पादपों में वह गति जो न तो उद्दीपन की दिशा में होती है और न ही उद्दीपन से दूर होती है, प्रकुंचन गति कहलाती है।
21. जलानुवर्तन (Hydrotropism)-पादप की जड़ों का जल की ओर गति करना जलानुवर्तन कहलाता है।
22. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)-पादप के तने का प्रकाश की ओर गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। 23. रसायनानुवर्तन (Chemotropism)-पादप के किसी भाग का रसायन की ओर गति करना रसायनानुवर्तन कहलाता है।
24. गुरूत्वानुवर्तन (Geotropism)-पादप की जड़ों में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गति गुरूत्वानुवर्तन गरि कहलाती है।
25. अंतःस्वावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands)-जंतुओं में नलिकाविहिन ग्रंथियाँ जो हार्मोनों का स्त्रावण करनी है. अंतःस्वावी ग्रंथियाँ कहलाती हैं।
26. हार्मोन (Hormone) वे रसायन जो पौधों तथा जंतुओं में नियंत्रण व समन्वय का कार्य करते हैं, हार्मोन कहलाते हैं।
27. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)-शरीर में होने वाली अचानक एवं तीव्र प्रक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं। यह क्रिया अचंतन तथा अनैच्छिक क्रिया है।
28. मेरूरज्जु (Spinal Cord)-तंत्रिका ऊतक को एक बेलनाकार संरचना जो रीढ़ की हड्डी में से होकर गुजरती है है, मेरूरज्जु कहलाती है।
तथा प्रतिवर्ती क्रियाओं का केन्द्र होती 29. कपाल (खोपड़ी) (Cranium) अस्थियों का बना एक रक्षात्मक कवच जो मस्तिष्क की रक्षा करता है, कपात
कहलाता है। 30. बायरॉक्सिन हार्मोन (Thyroxin Hormone)-घयरॉक्सिन ग्रंथि द्वारा स्त्रावित हार्मोन जो शरीर में कार्बोहायड्रेट
वसा तथा प्रोटीन के उपापचय को नियंत्रित करता है, थायरॉक्सिन हार्मोन कहलाता है।
31. वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone)-पीयूष ग्रंथि द्वारा स्त्रावित हार्मोन जो जीव की वृद्धि को प्रभावित करता है. वृद्धि हामर्मोन कहलाता है।
32. इंसुलिन (Insulin)-आग्न्याशय द्वारा स्त्रावित हार्मोन जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है, इंसुलिन हामॉन कहलाता है।
33. अनुमस्तिष्क (Cerebellum)-यह पश्चमस्तिष्क का वह भाग है जो शरीर का संतुलन तथा स्थिति को बनाए रखत है।
34. दिशिक गतियाँ (Directional Movements)-पादपों में वे गतियाँ जो उद्दीपन की दिशा में होती है, दिशिक गतियाँ कहलाती हैं।
35. प्रमस्तिष्क (Cerebrum)-प्रमस्तिष्क अग्रमस्तिष्क का प्रमुख भाग है जो अनेक महत्त्वपूर्ण संवेदनाओं तथा बुद्धिमत का स्थल है।
36. अदिशिक गतियों (Non-directional Movements)-पादपों में वे गतियाँ जो न तो उद्दीपन की दिशा में और र ही उद्दीपन की दिशा के विपरीत होती है, अदिशिक गतियाँ कहलाती है।
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न
(TEXTUAL QUESTIONS)
* अनुभाग 6.1 (पेज-117) के प्रश्न
प्रश्न 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है?
इत्तर- प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच निम्नलिखित अंतर हैं-
प्रतिवर्ती क्रिया
(1) यह तीव्र प्रतिक्रिया है।
(ii) यह अनैच्छिक प्रतिक्रिया है।
(iii) यह मेरूरज्जु द्वारा नियंत्रिण होती है।
(iv) इस क्रिया में केवल एक भाग में प्रतिक्रिया होती है।
(v) इसमें सोचने की आवश्यकता नहीं होती।
टहलना
(i) यह धीमी प्रतिक्रिया है।
(ii) यह ऐच्छिक है।
(iii) यह मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती हैं।
(iv) इस क्रिया में पूरे शरीर में प्रतिक्रिया होती है।
(v) इसमें सोचने का प्रक्रम होता है।
2. वो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है? उत्तर- दो न्यूरॉन के मध्य कार्यात्मक रिक्त स्थान को अंतर्ग्रथन कहते है। इस रिक्त स्थान में एक रसायन पदार्थ होता है
(HBSE 2018)
जिसे न्यूरोट्रांसमीटर कहते हैं। इस रसायन में से सूचना रासायनिक संकेत के रूप में एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में स्थानांतरित होता है। यदि न्यूरॉन एक-दूसरे के भौतिक संपर्क में हो तो सूचना कंवल विद्युत संर्कित के रूप में
गति करती है।
इस प्रकार सिनेप्स पर सूचना आवेग का स्थानांतरण होता है। मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
प्रान. 3. उत्तर- अनुमस्तिष्क, जो पश्चमस्तिष्क का भाग है. शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है।
प्रश्न 4 हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?
उत्तर- अगरबत्ती से रसायन वायु में विसरित हो जाते हैं तथा नासाद्वारा से होकर नाक में प्रवेश करते हैं। नासिक गुहा में ये रसायन श्लेष्मा में घुल जाते हैं। भ्राणग्राही इन रसायनों को संवेदना के रूप में ग्रहण करते हैं तथा संवेदी तंत्रिकाओं के द्वारा अग्रमस्तिष्क में प्रेषित कर देते हैं। अग्रमस्तिष्क में सवेदना का विश्लेषण होता है तथा हमें सुगंध
का अनुभव होता है। प्रश्न 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
(HBSE 2023)
उत्तर- प्रतिवर्ती क्रिया को पूर्ण करने में मस्तिष्क की अपेक्षा मेरूरज्जु की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। शरीर के किसी भाग से संदेश तीव्रता से मेरूरज्जु तक पहुँचता है और उतनी ही गति से संदेश संबंधित मांसपेशियों तक पहुँचता है और अनुक्रिया संपन्न हो जाती है। जैसे-जब धूल का कोई कण हमारे नाक में घुसता है, तो इसकी सूचना मेरूरन्तु में पहुँच जाती है। मेरूरज्जु से इसका संदेश नाक की मासपेशियों तक पहुँचता हैं तथा हमें छींक आ जाती है। प्रतिवर्ती क्रियाओं में सीधे रूप में मस्तिष्क की कोई भूमिका नहीं होती। अनुक्रिया संपन्न होने के उपरान्त उसका संदेश मस्तिष्क तक अवश्य पहुँचता है।
* अनुभाग 6.2 (पेज-121) के प्रश्न
प्रश्न 1. पादप हार्मोन क्या हैं?
उत्तर- वे रसायन जो पादपों में नियंत्रण एवं समन्वय कार्य करते हैं, पादप हार्मोन कहलाते हैं। पादप हार्मोन बहुत ही कम मात्रा में स्त्रावित होते हैं, परन्तु पादपों की विभिन्न क्रियाओं जैसे वृद्धि, विकास, फूल एवं फल का आना, फलों का पकना तथा विभेदन संबंधी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार पादप हार्मोन पौधों में समन्वय स्थापित करते हैं।
उदाहरण-ऑक्सिन, जिब्बेरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल आदि।
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प्रश्न 2. छुई मुई पावप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर- (a) छुई मुई पादप की पत्तियों की गति छुई मुई एक संवेदनशील पौधा है। जब इसकी पत्तियों को हुआ जात है तो इनकी गति न तो उद्दीपन की दिशा में होती है और न ही उद्दीपन के विपरित दिशा में होती है। इस प्रकार की गति प्रकुंचन गति कहलाती है। इसे अदिशिक गति भी कहते हैं।
(b) प्रकाश की ओर प्ररोह की गति-किसी पादप का प्ररोह सदैव प्रकाश की ओर गति करता है। इस प्रकार की गति को प्रकाशानुवर्तन गति कहते हैं। यह सदिशिक गति भी कहलाती है क्योंकि यह उद्दीपन (प्रकाश) की दिशा में होती है।
प्रश्न 3. एक पादप हार्मोन का उदाहाण वीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर- ऑक्सिन।
प्रश्न 4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर- किसी पौधे में प्रतान पत्तियों तथा तने के रूपांतरित रूप ही होते हैं। ये रस्सी की तरह की संरचनाएँ होती हैं तथा स्पर्श के प्रति संवेदनशील होती है। जब वे किसी सहारे के संपर्क में आते हैं तो प्रतान का जो भाग सहारे के संपर्क में होता है, उसको वृद्धि धीरे-धीरे होती है। जबकि प्रतान का वस्तु (सहारे) से दूसरी ओर का भाग अधिक तव्रिता से वृद्धि करता है, क्योंकि उस ओर
ऑक्सिन की सांद्रता अधिक होती है। इससे प्रतान वस्तु (सहारे) चित्र-प्रतान के चारों ओर घूम जाता है और इसे जकड़ लेता है। की स्पर्श के लिए संवेदनशीलत
प्रश्न 5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
उत्तर- (1) दो काँच के टब A तथा B लें।
(ii) दोनों टबों के 2/3 भाग को मृदा से भर लें।
(iii) टब A में एक छोटा-सा पौधा लगाएँ।
(it) टब B में भी एक छोटा-सा पौधा लगाए तथा उसके साथ में मृदा पर एक मिट्टी का गमला भी रख दें।
(२) टब A में मृदा में प्रतिदिन समान रूप से पानी देते रहें परन्तु टब B में मृदा में पानी न डाले यद्यपि मिट्टी
के गमले में कुछ पानी अवश्य डाल दें। (3) अब इन दोनों टबों को कुछ दिनों के लिए स्वतंत्र छोड़ दें।
गीली मुदा
सुखी मृदा
टब (A) जड़ सीधा वृद्धि करती है।
गीली
चित्र-जलानुवर्तन दशनि का प्रयोग
टब (B)-जड़ गीली मृदा की ओर मुड़ जाती है।
(vi) अब बिना जड़ों को नुकसान पहुँचाए दोनों पौधो की खुदाई करें। प्रेक्षणः हम देखेंगे कि टब-A में पौधे की जड़ सीधा है जबकि टब-B में पौधे की जड़ पानी की ओर मुड़ जाती है। निष्कर्षः इस प्रयोग से हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि पौधे की जड़ें पानी की ओर वृद्धि करती हैं. अर्थाद पत्र की जड़े जलानुवर्तन प्रदर्शित करती हैं।
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* अनुभाग 6.2 (पेज-123) के प्रश्न
प्रात्र 1. जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
इतर- जंतुओं में रासायनिक समन्वय का कार्य हामीन करते हैं। ये हामौन अंतःस्वावी प्रथियों द्वारा स्वावित किए जाते हैं। चे शरीर के एक भाग स्त्रावित होते हैं तथा शरीर के दूसरे भाग में विशिष्ट अंगों पर कार्य करते हैं जिन्हें टारगेट अंगे कहते हैं। अंत: स्त्रावी ग्रंथियाँ सीधे रक्त में इन हामीनों का स्त्रावण करती हैं तथा रक्त के माध्यम से ही इनका स्थानांतरण कुछ विशेष कोशिकाओं में होता है। इन कोशिकाओं की सतह पर कुछ अणु उपस्थित होते हैं जो इन हार्मोनों को पहचान लेते हैं। जो सूचना हार्मोन में निहित होती है, उसी के अनुसार ये कोशिकाएँ कार्य करती हैं। इस प्रकार विभिन्न हार्मोन विशिष्ट अंगों के कार्यों को नियंत्रित करके समन्वय स्थापित करते हैं।
प्रश्न 2. आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों वी जाती है?
उत्तर- आयोडीन युक्त नमक लेने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि थायरॉइड ग्रंथि (अवटुग्रंथि) को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। धायरॉक्सिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन के उपापचय को नियंत्रित करता है। साथ ही यह वृद्धि के संतुलन के लिए भी आवश्यक है। धायरॉक्सिन हामर्मोन की कमी से गॉयटर (घेघा) नामक रोग हो जाता है। गॉयटर से बचने के लिए आयोडीनयुक्त नमक लेना आवश्यक है।
प्रान 3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
उत्तर- जब एड्रीनलीन रुधिर में स्त्रावित होता है तो यह हृदय की धड़कन को बढ़ा देता है। ताकि मांसपेशियों में अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके। पाचन तंत्र तथा त्वचा में रक्त की आपूर्ति पेशियों के सिकुड़ने के कारण कम हो जाती है। रक्त को कंकाल पेशियों की ओर मोड़ दिया जाता है। शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के लिए श्वसन दर भी बढ़ जाती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर किसी व्यक्ति को भय एवं तनाव की स्थिति अर्थात् आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं। यही कारण है कि एड्रीनलीन को आपातकालिक हार्मोन
भी कहते हैं।
प्रान 4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
उत्तर- इंसुलिन हार्मोन रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) की मात्रा को नियंत्रित करता है। यदि इस हार्मोन का स्त्रावण उचित मात्रा में नहीं होता है तो रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण व्यक्ति को मधुमेह का रोग हो जाता है। इसके कारण शरीर पर अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इसलिए रक्त में शर्करा के बड़े स्तर के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए मधुमेह के रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर की जाती है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास के प्रश्न (TEXTUAL EXERCISES)
मन 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन
(c) एस्ट्रोजन
(b) (d) साइटोकाइनिन
उत्तर- (d) साइटोकाइनिन
को कहते हैं-
प्रशन 2 दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान
(b) सिनेप्स
(a) दुमिका
(d) आवेग
(८) एक्सॉन
उकर (b) सिनेप्स
मस्तिष्क उत्तरदायी है-
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
अन 3.
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर- (d) उपरोक्त सभी
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प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर- (1) ग्राही-ग्राही के कोशिकाएँ (न्यूरॉन) होती हैं जो संवेदना को ग्रहण करती हैं। ग्राही का कार्य-ग्राही पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों की सूचना ग्रहण करके उन सूवनाओं को विश्लेषण हेतु मस्तिष्क को भेजती हैं।
(i) यदि ग्राही सही प्रकार से कार्य न करें तो हमारा शरीर उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया नहीं करा पाएगा। इस शरीर को बहुत हानि हो सकती है और मृत्यु तक भी हो सकती है। उदाहरण-यदि हमारी आँख के ग्राही देखने की संवेदना (प्रकाश) को ग्रहण न करें तो हम इस सुन्दर संसार की किसी भी वस्तु को नहीं देख पाएँगे तथा संसार की इन वस्तुओं का आन्नद नहीं ले पाएँगे।
प्रश्न 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए। उत्तर- तंत्रिका कोशिका की संरचना तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई को तंत्रिका कोशिका कहते हैं। यह शरीर में पायी जाने वाली सबसे लंबी कोशिका है।
तंत्रिका कोशिका
के भाग तंत्रिका कोशिका के निम्नलिखित तीन
भाग होते हैं-
(1) कोशिका काय
(ii) हुमिकाएँ
(iii) तत्रिकाक्ष
(1) कोशिका काय-कोशिका काय में एक केन्द्रक तथा कोशिका द्रव्य होता है।
(ii) बुमिकाएँ-हुमिकाएँ छोटे तथा शाखित प्रवर्ध होते हैं जो कोशिका काय से निकलते हैं।
(iii) तंत्रिकाक्ष-यह कोशिका काय में से निकलने वाला सबसे लंबा प्रवर्ध होता है।
दुमिका
कोशिका काप
तत्रिकाक्ष
तंत्रिका का अंतिम सिरा
(a)
तंत्रिका पेशीय संधि
पेशी फाइबर
कोशिका
(b)
चित्र (2) तंत्रिका कोशिका का चित्र (b) तत्रिका पेशीय संधि
तंत्रिका कोशिका के कार्य:
(1) उद्दीपन को ग्रहण करना तथा इसे मेहर और मस्तिष्क को प्रेषित करना। (ii) मस्तिष्क और मेरुरज्जु से प्राप्त संदेश को प्रभावित अंगों तक पहुंचाना। (iii) शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य करना।
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पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर- पादपों में प्ररोह (तना) का प्रकाश की ओर मुड़ना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना ऑक्सिन के संश्लेषण तथा उसके एकत्रित (सान्द्रिता) होने पर निर्भर करता है। पादपों में तने के सिरे पर ऑक्सिन होर्मोन का संश्लेषण होता है। जब सूर्य का प्रकाश इस पर पड़ता है तो पौधे के छाया वाले भाग की ओर स्थानांतरित हो जाता है। इसलिए पौधे का वह भाग जो छाया में होता है वहाँ ऑक्सिन हार्मोन की सांद्रता अधिक होती है तथा पौधे का वह भाग जो सीधे प्रकाश की ओर होता है वहाँ ऑक्सिन की सांद्रता कम होती है। यही कारण है कि पौधे के छायादार भाग में अधिक वृद्धि होती है तथा प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
चित्र-प्रकाश की दिशा में पादप की अनुक्रिया
7. मेरूरज्जु आघात में किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?
उत्तर- (1) सभी अनैच्छिक क्रियाओं में व्यवधान होगा।
(ii) प्रतिवर्ती क्रियाओं में व्यवधान होगा क्योंकि प्रतिवर्ती क्रियाओं को मेरूरज्जु ही प्रमुख रूप से नियंत्रित करता है। इसलिए शरीर को सुरक्षित बनाए रखने के लिए अचानक एवं तीव्रता से होने वाली अनुक्रियाओं में व्यवधान
होगा।
(a) मेरूरज्जु आघात के फलस्वरूप पर्यावरण से प्राप्त सूचना मस्तिष्क में पहुँचेगी तथा मस्तिष्क उसका विश्लेषण करके अंग तक संदेश पहुँचाएगा। ऐसा होने से अधिक देर लगेगी और तब अंग कुप्रभावित हो जाएगा।
प्रन &. पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?
उत्तर- पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हॉर्मोनों के द्वारा होता है। ये पादप हार्मोन अधिकतर विभज्योत्तक क्षेत्र में संश्लेषित होते हैं, जहाँ कोशिका विभाजन होता रहता है। इन कोशिकाओं से पादप हार्मोन आसपास की कोशिकाओं में विसरित हो जाते हैं। आसपास की कोशिकाओं में ग्राही अणु होते हैं जो उन्हें संसूचित (पहचान) कर लेते हैं तथा सूचना अन्य कोशिकाओं को प्रेषित कर देते हैं।
उदाहरण- (1)
ऑक्सीन हार्मोन वृद्धि,
अनुवर्तन गतियों, जड़ (ii) एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोधक पादप हार्मोन है।
विभेदन आदि को नियंत्रित करते हैं।
एन. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय की क्या आवश्यकता होती है? उहा- किसी जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता निम्न कार्यों को संम्पन्न करने के लिए होती है-
(1) पर्यावरण में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों से जीव सुरक्षा करने के लिए।
(ii) ऐच्छिक तथा अनैच्छिक क्रियाओं पर नियंत्रण करने के लिए।
(iii) जीवों में सोचने; विश्लेषण करने; एवं निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने के लिए।
(iv) किसी उद्दीपन के प्रति उचित प्रतिक्रिया में सहायता के लिए।
इन 10. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न है? उतर- अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से निम्न प्रकार से भिन्न है-
अनैच्छिक क्रियाएँ
प्रतिवर्ती क्रियाएँ
(1) शरीर में होने वाली वे क्रियाएँ जिन्हें हम इच्छानुसार नियंत्रित नहीं कर सकते, अनैच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं।
किसी उद्दीपन के प्रति अचानक एवं तीव्रता से होने वाली क्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती है।
(1) इनका नियंत्रण मध्य मस्तिष्क तथा पश्चमस्तिष्क द्वारा किया जाता है।
इनका नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा किया जाता है।
उदाहरण-सांस लेना, हृदय का धड़कना आदि।
उदाहरण- छोकना, खांसना, मुँह में लार आना आदि।
Refresher Series
प्रश्न 11. जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (contrast) कीजिए।
उत्तर- तंत्रिका तथा हार्मोन दोनों ही जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य करते हैं। इन दोनों की क्रियाविधि में निम्न
तंत्रिका क्रियाविधि
(i)
यह एक तीव्र प्रक्रिया है।
(ii)
यह उपापचय को नियंत्रित नहीं करती।
(iii)
इससे वृद्धि पर प्रभाव नहीं पड़ता।
(iv)
इसमें तंत्रिका कोशिकाएँ, मस्तिष्क, मेरुरज्जु होते हैं।
(v)
धमनियाँ एवं ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं।
(vi)
इसका संचरण वैद्युतरसायन आवेग के रूप में होता है।
हार्मोन क्रियाविधि
यह धीमी प्रक्रिया है।
यह उपापचय को नियंत्रित करती है।
इससे वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है।
इसमें रासायनिक संदेशवाहक हार्मोन होते हैं।
यह टारगेट अंग को प्रभावित करती है।
इसका संचरण रासायनिक आवेग के रूप में होता है।
प्रश्न 12. छुई मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है?
उत्तर- छुई
मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति में निम्नलिखित अंतर है-
छुई मुई पादप में गति
(1)
इसमें तंत्रिका पेशीय नियंत्रण नहीं होता।
(ii) जल की मात्रा में परिवर्तन से कोशिकाओं की आकृति में परिवर्तन होता है।
(iii) यह अदिशिक गति है।
टाँग में गति
इसमें तंत्रिका पेशीय नियंत्रण होता है।
■
यह पेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने से होता है।
यह दिशिक गति होती है।

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